बस यूं ही…!

अधूरी जिन्दगी का पूरा किस्सा हो तुम,
मेरी ख़ुशी का अब पूरा हिस्सा हो तुम।।

:- चन्द्र प्रताप सिंह(आर्यन)

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बस यूं ही..!

जिन्दगी मे जब, जैसे जिससे भी मिलो बस बिना बात के मुस्कुरा कर मिलो।
कुछ तो आपकी खुशी देख मुस्कुरा देंगे तो कुछ पागल समझ के…..! लेकिन मुस्कुराना तय है ।

:- चन्द्र प्रताप सिंह।

गुमनामी मे गुमनाम…!

मैने लिखा दिल से दिल को ये पैगाम

गुमनामी मे एक चिट्ठी गुमनाम

बिना लिखे पता वो चिट्ठी मैने डाक मे डाल दिया
सोचा होगा कोई शहर मे मुझ जैसा गुमनाम,

जिस तक ये चिट्ठी चलकर पहुँच जायेगा!

घुम फिर के चिट्ठी वापस एक दिन मेरे दर पे आ गयी,

डाकियां बोला—–

हे…. गुमनाम मुसाफिर, तेर लिये एक गुमनाम सी चिट्ठी आ गयी।

२७/०१/२०१८

– चन्द्र प्रताप सिंह

यायावार

कभी आराम से चलता हूं, कभी अयाम को चलता हूं,

मै राह का हूं वो मुसाफिर जो बीना काम के चलता हूं!

:- चन्द्र प्रताप सिंह

बस यूं ही ….!

अगर हालात, लम्हात और जज्बात समझा जाये तो खुशी मनाने के लिये कोई खास पल या दिन नही ढुढा जायेगा बस हर पल मे खुशी मनाने का एक जरिया नजर आयेगा ।