बस यूं ही 

​सब पुछे बोल देरे दिल मे क्या है भरा?

मै था तो समन्दर सा, 

फिर भी बोला जैसे कोई खाली घड़ा ।

:-

चन्द्र प्रताप सिंह

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बस यूं ही !

सुनो…..

जिन्दगी में अगर कभी बिछड़ना हो तो,

एक काम करना बस जरा सा तुम मेरा मान करना।

मुझसे कभी किश्तो मे मत बिछड़ना जब,

मैं मुकम्मल नींद मे चला जाऊँ तब,

तुम मुकम्मल तौर पर बिछड़ जाना,

बस ज़िन्दगी में इतना तुम अहसान कर जाना।

:-

चन्द्र प्रताप सिंह